कैबिनेट ने 2031 तक PM-KISAN को जारी रखने और "खेलो इंडिया" को मज़बूत करने को मंज़ूरी दी।

  • कैबिनेट ने PM-KISAN को 2030–31 तक बढ़ाया और खेलो इंडिया का विस्तार किया।
  • PM-KISAN: ₹3.15 लाख करोड़ के बजट के साथ 2026–31 तक बढ़ाया गया।
  • DBT के ज़रिए पात्र किसानों को हर साल ₹6,000 दिए जाते हैं।
  • खेलो इंडिया: 5 सालों के लिए ₹36,441 करोड़ आवंटित (NSF सहित), जो पिछले आवंटन का लगभग 8 गुना है।
  • ओलंपिक टैलेंट के लिए ग्रासरूट (निचले स्तर) से TOPS तक के रास्ते को मज़बूत करता है।


इटली ने प्रवासियों की भारी आमद के बीच स्पेन के लिए शेंगेन मुक्त आवाजाही के नियमों को निलंबित किया।

  • स्यूटा (Ceuta) में प्रवासियों की भारी आमद के बाद इटली ने स्पेन के साथ शेंगेन बॉर्डर-मुक्त यात्रा को एक महीने के लिए अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया।
  • स्पेन से आने वाले यात्रियों (हवाई और समुद्री मार्गों से) के लिए पासपोर्ट और आईडी जांच फिर से शुरू की गई।
  • यह कदम मोरक्को से स्यूटा में प्रवासियों की भारी आमद के कारण उठाया गया।
  • सार्वजनिक व्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की स्थिति में शेंगेन नियमों के तहत इसकी अनुमति है।
  • शेंगेन क्षेत्र: 29 यूरोपीय देशों में पासपोर्ट-मुक्त यात्रा की सुविधा देता है।
  • स्यूटा: उत्तरी अफ्रीका में स्थित स्पेन का एक क्षेत्र (एनक्लेव), जिसकी सीमा मोरक्को से लगती है।


वर्षा अशोक अगलावे GSI की पहली महिला महानिदेशक नियुक्त।

  • वर्षा अशोक अगलावे जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (GSI) की पहली महिला महानिदेशक बनीं।
  • 31 जुलाई 2026 को 54वीं महानिदेशक के तौर पर पदभार संभाला।
  • GSI के 176 साल के इतिहास में इसकी प्रमुख बनने वाली पहली महिला।
  • 30 से ज़्यादा सालों के अनुभव वाली जीवाश्म विज्ञानी (palaeontologist)।
  • इससे पहले कोलकाता में अतिरिक्त महानिदेशक (पूर्वी क्षेत्र) के तौर पर काम किया।


पश्चिम बंगाल ने भारत की 16वीं जनगणना के लिए "सेल्फ़-एन्यूमरेशन" (खुद जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया) शुरू की।

  • पश्चिम बंगाल ने भारत की 16वीं जनगणना (जनगणना 2027) के सेल्फ़-एन्यूमरेशन चरण की शुरुआत की।
  • यह भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी।
  • सेल्फ़-एन्यूमरेशन: 1–15 अगस्त 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से।
  • घर-सूचीकरण (हाउस-लिस्टिंग) चरण: 16 अगस्त–14 सितंबर 2026 तक।
  • जनगणना का डेटा गोपनीय होता है और इसका इस्तेमाल केवल सांख्यिकीय और योजना बनाने के उद्देश्यों के लिए किया जाता है।


गुजरात की राठवा जनजाति की पिथोरा पेंटिंग को GI टैग मिला।

  • गुजरात की पारंपरिक पिथोरा पेंटिंग को 2 अगस्त 2026 को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिला।
  • उत्पत्ति: गुजरात की राठवा, भीलाला और नायका जनजातियों की पारंपरिक दीवार कला।
  • महत्व: समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति के लिए बाबा पिथोरा की पूजा करने के उद्देश्य से बनाई जाती है।
  • विशेषताएं:
    • घोड़े मुख्य आकृति हैं जो देवताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
    • इसमें सूर्य, चंद्रमा, जानवरों, पक्षियों और खेती को दर्शाया जाता है।
    • जनजातीय संस्कृति को दर्शाने वाले चमकीले रंगों का इस्तेमाल किया जाता है।
  • GI के फायदे: नकल से सुरक्षा मिलती है और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच को बढ़ावा मिलता है।

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