NABI मोहाली में भारत के पहले ग्रीन फोर्ज कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन।
- डॉ. जितेंद्र सिंह ने BRIC-NABI, मोहाली में भारत के पहले ग्रीन फोर्ज कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया।
- यह AI-आधारित एनवायरनमेंटल सिमुलेशन का इस्तेमाल करके GM फसलों की नियंत्रित रिसर्च और खेती को संभव बनाता है।
- बायो-फाउंड्री नेटवर्क: 8 बायो-फाउंड्री + 22 मैन्युफैक्चरिंग हब जो बायोटेक इनोवेशन को बढ़ावा देते हैं।
- भारत की बायो-इकोनॉमी US$10 बिलियन से बढ़कर US$200 बिलियन तक पहुँच गई है।
- यह ISRO से जुड़े स्पेस बायोटेक्नोलॉजी प्रयोगों और कार्बन कैप्चर और इस्तेमाल (Carbon Capture & Utilisation) से जुड़े प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट करता है।
तुर्की आर्टेमिस समझौते का 71वां हस्ताक्षरकर्ता बना।
- तुर्की अमेरिका के नेतृत्व वाले आर्टेमिस समझौते में शामिल होने वाला 71वां देश बन गया है।
- उद्देश्य: चंद्रमा, मंगल और गहरे अंतरिक्ष की शांतिपूर्ण और पारदर्शी खोज को बढ़ावा देना।
- आधार: यह 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी (बाह्य अंतरिक्ष संधि) पर आधारित है।
- मुख्य प्रावधान: वैज्ञानिक डेटा साझा करना, अंतरिक्ष यात्रियों को आपातकालीन सहायता और चंद्रमा पर मौजूद ऐतिहासिक स्थलों (लूनर हेरिटेज साइट्स) का संरक्षण।
- तुर्की की अंतरिक्ष उपलब्धि: अल्पर गेज़ेरावसी अंतरिक्ष में जाने वाले पहले तुर्की नागरिक बने (2024)।
FY26 में भारत का नारियल निर्यात 62% बढ़कर ₹7,038 करोड़ हुआ।
- निर्यात में बढ़ोतरी: FY26 में भारत का नारियल निर्यात 62% बढ़कर ₹7,038.25 करोड़ हो गया।
- ग्लोबल पहुंच: नारियल से बने उत्पादों का निर्यात अब 155 देशों में किया जाता है।
- मुख्य इस्तेमाल: नारियल उत्पादों का इस्तेमाल पानी को साफ़ करने, कैपेसिटर, दवाइयों और सोने की माइनिंग में किया जाता है।
- विश्व नारियल दिवस 2026: यह 2 सितंबर, 2026 को तिरुवनंतपुरम में मनाया जाएगा।
- थीम: अनिश्चितता के दौर में नारियल: भोजन, ऊर्जा और आजीविका को सुरक्षित करना।
भाषिनी ने मल्टीलिंग्वल AI में भारत-नेपाल सहयोग को बढ़ावा दिया।
- भाषिनी शिल्पी: मल्टीलिंग्वल AI में भारत-नेपाल सहयोग को मज़बूत करने के लिए लॉन्च किया गया।
- डिजिटल समावेश: भाषा की बाधाओं को दूर करने और डिजिटल एक्सेस को बेहतर बनाने के लिए AI का इस्तेमाल करता है।
- स्केल: 800 से ज़्यादा सरकारी वेबसाइटों और रोज़ाना 2.4 करोड़ से ज़्यादा AI इन्फरेंस को सपोर्ट करता है।
- भाषा सपोर्ट: टेक्स्ट के ज़रिए 36 भारतीय भाषाओं और वॉइस के ज़रिए 23 भाषाओं को कवर करता है।
- नेशनल प्लेटफ़ॉर्म: AI-आधारित अनुवाद और स्पीच सेवाओं के लिए भारत के प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर काम करता है।
IAF ने 3D प्रिंटिंग और डिजिटल ट्विन्स के ज़रिए 62,300 स्पेयर पार्ट्स को देश में ही बनाना शुरू किया।
- स्वदेशीकरण: IAF ने 3D प्रिंटिंग और डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके 62,300 एयरक्राफ्ट स्पेयर पार्ट्स को देश में ही बनाना शुरू किया है।
- आर्थिक असर: विदेशी मुद्रा में ₹582 करोड़ की बचत हुई और घरेलू डिफेंस बिज़नेस में ₹17,000 करोड़ से ज़्यादा का कारोबार हुआ।
- इंडस्ट्री पार्टनरशिप: MSME और स्टार्टअप्स समेत 930 भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम किया।
- टेक्नोलॉजी: ज़रूरी और कम मात्रा वाले स्पेयर पार्ट्स के लिए 3D प्रिंटिंग और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस के लिए AI-आधारित डिजिटल ट्विन्स का इस्तेमाल किया जाता है।
- फ्लीट कवरेज: इसमें Su-30MKI, राफेल, तेजस, मिराज 2000 और MiG-29 शामिल हैं।
- घरेलू उपलब्धता: इसमें अक्सर इस्तेमाल होने वाले 97% और ज़रूरी ओवरहॉल स्पेयर पार्ट्स का 93% हिस्सा शामिल है।
- डिजिटल बैकबोन: e-MMS मेंटेनेंस, इन्वेंट्री और सुरक्षा को ट्रैक करता है।
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