JAXA ने जापान के पहले दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट को लॉन्च और लैंड कराकर इतिहास रचा।

  • JAXA ने जापान के पहले दोबारा इस्तेमाल होने वाले प्रोटोटाइप रॉकेट का सफल परीक्षण किया।
  • यह परीक्षण अकिता प्रान्त के नोशिरो टेस्ट सेंटर में किया गया।
  • रॉकेट 10 मीटर की ऊंचाई तक गया और 40 सेकंड की उड़ान के बाद सुरक्षित रूप से लैंड किया।
  • इसका मकसद स्पेस लॉन्च की लागत को कम करने के लिए दोबारा इस्तेमाल होने वाले फर्स्ट-स्टेज बूस्टर विकसित करना है।
  • यह उपलब्धि जापान के दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट प्रोग्राम में एक बड़ा कदम है।


2026 की ग्लोबल रैंकिंग में भारत की एयरपावर तीसरे स्थान पर पहुँची।

  • 2026 की WDMMA एयरपावर रैंकिंग में IAF को दुनिया भर में तीसरा स्थान मिला।
  • USA पहले, रूस दूसरे और चीन चौथे स्थान पर रहा।
  • ये रैंकिंग ट्रू वैल्यू रेटिंग (TVR) सिस्टम पर आधारित हैं।
  • IAF लगभग 1,716 एयरक्राफ्ट का संचालन करती है।
  • आधुनिकीकरण में तेजस Mk-1A, राफेल फाइटर और C295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट शामिल हैं।
  • IAF का लक्ष्य फाइटर स्क्वाड्रन की संख्या को 29 से बढ़ाकर स्वीकृत 42 तक करना है।


भारत और न्यूज़ीलैंड ने 2030 के लिए रणनीतिक साझेदारी का रोडमैप तैयार किया।

  • भारत और न्यूज़ीलैंड ने 2030 तक के लिए रणनीतिक साझेदारी का रोडमैप घोषित किया।
  • लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके NZ$7 बिलियन तक पहुंचाना है।
  • भारत-न्यूज़ीलैंड FTA को जल्द लागू करने पर ज़ोर।
  • रक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को मज़बूत करना।
  • कृषि, पर्यटन, आपदा प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना।
  • न्यूज़ीलैंड, UN सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करता है।


एशिया का प्रमुख एयरोस्पेस एक्सपो, "एरो इंडिया 2027", बेंगलुरु में आयोजित होगा।

  • एरो इंडिया 2027 का आयोजन 8 से 12 फरवरी 2027 तक बेंगलुरु के येलहंका एयर फोर्स स्टेशन पर किया जाएगा।
  • यह एशिया के सबसे बड़े एयरशो का 16वां संस्करण होगा।
  • इस कार्यक्रम के लिए HAL नोडल एजेंसी है और BEL इसमें सहयोग कर रहा है।
  • वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया।
  • सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2029-30 तक ₹3 लाख करोड़ का रक्षा उत्पादन हासिल करना है।


ग्लोबल एड में कटौती से दस लाख महिलाएँ ज़रूरी मदद से वंचित।

  • मदद के संकट का असर: ग्लोबल एड (अंतर्राष्ट्रीय सहायता) में कटौती के कारण लगभग 10 लाख महिलाओं और लड़कियों को जीवन बचाने वाली मदद नहीं मिल पा रही है।
  • मानवीय ज़रूरत: दुनिया भर में लगभग 12 करोड़ महिलाओं और लड़कियों को मानवीय सहायता की ज़रूरत है।
  • फंडिंग की कमी: रिकॉर्ड स्तर पर हुई मदद में कटौती के कारण 90% संगठन ज़रूरतें पूरी करने में असमर्थ हैं।
  • संगठनों पर खतरा: सर्वे किए गए 855 संगठनों में से 40% के बंद होने का खतरा है।
  • सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाके: अफ़गानिस्तान, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो और हैती।
  • UN Women: जेंडर इक्वालिटी (लैंगिक समानता) और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए UN की एजेंसी, जिसकी स्थापना 2010 में हुई थी।

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