चीन का LineShine, TOP500 सुपरकंप्यूटर लिस्ट में पहले नंबर पर है।
- इसे 25 जून 2026 को नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DIAL द्वारा लॉन्च किया गया था।
- इसे इबोला के प्रकोप के दौरान अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की अनिवार्य स्वास्थ्य जांच के लिए शुरू किया गया था।
- इसके लिए हेल्थ सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म (SDF) को ऑनलाइन जमा करना ज़रूरी है।
- यह स्वास्थ्य और आव्रजन अधिकारियों के साथ रियल-टाइम डेटा शेयर करने की सुविधा देता है।
Skydo ने कनाडा में पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म लाइसेंस के साथ ग्लोबल स्तर पर अपना विस्तार किया।
- Skydo कनाडा में रेगुलेटरी लाइसेंस पाने वाला पहला भारतीय क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म बन गया है।
- यह लाइसेंस रिटेल पेमेंट एक्टिविटीज़ एक्ट के तहत दिया गया, जिसे बैंक ऑफ़ कनाडा रेगुलेट करता है।
- इससे कनाडा में बिज़नेस के लिए लोकल कलेक्शन और पेमेंट की सुविधा मिलती है।
- यह भारत और कनाडा के बीच दोनों तरफ़ से क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट के लेन-देन में मदद करता है।
- Skydo SME और इंटरनेशनल प्लेटफ़ॉर्म के लिए पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता है।
BharathCloud ने सॉवरेन क्लाउड सॉल्यूशंस के लिए ICSI के साथ साझेदारी की।
- MoU पर हस्ताक्षर: 23 जून 2026 को BharathCloud और ICSI के बीच।
- मकसद: सॉवरेन क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और AI सॉल्यूशंस उपलब्ध कराना।
- भारत में होस्ट किए गए सुरक्षित डेटा स्टोरेज को सुनिश्चित करता है।
- IaaS, PaaS और SaaS क्लाउड सर्विसेज़ देता है।
- ICSI सदस्यों को दो साल के लिए खास कीमत मिलेगी।
एयर इंडिया ने वाराणसी में "हब-एंड-स्पोक" ईज़ी कनेक्ट सर्विस शुरू की।
- इसे 25 जून 2026 को वाराणसी से एयर इंडिया की ईज़ी कनेक्ट पहल के तहत शुरू किया गया।
- इसमें दिल्ली को हब बनाकर हब-एंड-स्पोक मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है।
- यह वाराणसी के यात्रियों को 17 इंटरनेशनल डेस्टिनेशन से जोड़ती है।
- इसमें फ़ाइनल डेस्टिनेशन तक सिंगल चेक-इन और बैगेज ट्रांसफ़र की सुविधा मिलती है।
- इस सर्विस को और भारतीय शहरों तक बढ़ाने की योजना है।
तेलंगाना पुलिस ने भारत का पहला सॉवरेन AI प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया।
- C-SIGHT भारत का पहला सॉवरेन AI प्लेटफ़ॉर्म है जिसे तेलंगाना पुलिस ने लागू किया है।
- इसे TGCSB ने Vatins Systems के साथ मिलकर विकसित किया है।
- इसे बच्चों के यौन शोषण के अपराधियों की पहचान करने और डिजिटल जांच में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए यह पुलिस नेटवर्क के भीतर ऑफ़लाइन काम करता है।
- यह टिपलाइन प्रोसेसिंग के समय को घटाकर 20 मिनट या उससे कम कर देता है।
- बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री की पहचान करने में यह 98% सटीकता हासिल करता है।
- यह इमेज और वीडियो के विश्लेषण को ऑटोमेट करता है और डिजिटल सबूतों को कैटेगरी में बांटता है।
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